कुछ कही बातें ...कुछ अनकही बातें...
सब लिख डाली हैं मेरी बातें तुम्हारी बातें
Sunday, November 27, 2011
धुंध की बादल में जाके कहीं भटक जाऊं मैं; थोड़ी देर खुद से भी अकेले में मिल आऊं मैं; बहुत उलझ चूका मैं अपनी ही ज़िन्दगी में; खुद से अपने हिस्से का भी वक़्त ले आऊं मैं.
फिर से मुक्कादर की लकीरों ने लिख दिया इंतज़ार..
ReplyDeleteफिर वोही रात का आलम और चाँद निहारते हम !!!
"थोड़ी देर खुद से भी अकेले में मिल आऊं मै", bahut khuub sirji...behtereen!
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