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Friday, December 19, 2014

मुकीम-ए-दिल

ऐ मुकीम-ए-दिल तेरी उदासी की वजह क्या है
अगर वजह हूँ मैं  तो तु बता मेरी सज़ा क्या है 

बस मुस्कानें ही तो मांगी थी तेरे लिये फ़लक से
सर्द जाम-ए-अश्क मैं तेरे भला मुझे मज़ा क्या है

कैसे मनाऊं खुशिओं के तेरे आँगन में लाने को 
ज़ुबां पर तो कभी ला मेरे लिए तेरी रज़ा क्या है 

दिल दुखा के खुदका क्यों मुझे तड़फ़ाते हो 
मेरा भी दिल है,यह सितमगर अदा क्या है। 

Thursday, October 16, 2014

इलाज ए ईश्क

इलाज ए ईश्क में नुसखा बस यही काम आया,
चबाईं नीम की पत्तियाँ ज़ायक़ा मीठा बताया। 
रात भर शिकवे किये खुद से ही जिसके लिये,
सुबह को उसी को ही अपना हाल अच्छा बताया।।

Thursday, October 11, 2012

he eshwar, teri parikhsha ab aur nahi sahi jati,
yeh peeda, teri ruthaii ab aur nahi jati,
shabd aur aashru bandh, jarjar ho chala
ghor tam, kaali raat ab aur nahi jaati....
yeh purane raste aajkal naye naye se kyu lagate he;
muhalle wale ye log har roj anjane se kyu lagate he,
shahar wahi, abadi wahi, aur me bhi wahi hi to hu...
sirf halat ke badalne apne paraye se kyu lagate he.
इत्तेफाक होता हे या उपर वाले का मजाक होता हे; 
साथ न होने पे छाते के बारिश का आना होता हे, 
कितना करते हो जद्दोजहद अपनी मर्जी के लिए; 
अमां मान भी जाओ होता वही हे जो होना होता हे......
Bhigi hui palake bhi kamal karti hain,
Dawa har jakhm ki bemisal karti hain,
Aankho ki jami gard saaf ho jati he,
Taja nazaro ka sara jamal karti hain.....

Wednesday, October 10, 2012

ऐ मुकीम-ऐ-दिल तेरी उदासी की वजह क्या है,
अगर वजह हूँ मैं तो बता की मेरी सजा क्या है| 
बेबस हूं मैं अभी मर्जी-ऐ-आसमानी के आगे,
वरना तेरे अश्कों के नमक  में मुझे मजा क्या है|
जरा मेरा साथ तो दे ज़िन्दगी  बहुत है बाकी, 
वैसे इस पड़ाव  के आगे सफ़र में बचा क्या है|
हालात काबू हो जायेंगे रफ़्तार-ऐ-वक़्त से,
थोड़े सब्र की गुजारिश है बता तेरी रजा क्या है| 
साथ मेरे तो रहते हो पर साथ नहीं लगते हो, 
मुस्कुराने के बाद दिल दुखाने की अदा क्या है।

Thursday, May 10, 2012

suna tha kii, mout ek hi martaba aati he,
aisi ho gai zindagi, wo har subah aati he...

Wednesday, March 28, 2012

ताजुल से महकती सुबह की अजान है;
दुपहरिया में चमकती सुनहरी ताल है,
पान लतीफे से सज़ती हर ज़बान है;
अमां, ज़रा अदब से, यह शहर भोपाल है .....

Thursday, December 15, 2011


जो जो आंसू आँख मेरी बहा ना सकीं, उन्हें दिल खून में मिलाता गया|
जब जब टकराया किसी पत्थर से मैं, मैं खुद को पत्थर बनाता गया||

Friday, December 2, 2011


खेतों में भागता था में आजाद हवा की रफ़्तार से|
अब चलते हुए भी टकराता हूँ कन्धों की दिवार से||

Sunday, November 27, 2011

धुंध की बादल में जाके कहीं भटक जाऊं मैं;
थोड़ी देर खुद से भी अकेले में मिल आऊं मैं;
बहुत उलझ चूका मैं अपनी ही ज़िन्दगी में;
खुद से अपने हिस्से का भी वक़्त ले आऊं मैं.

Friday, November 25, 2011

वो मुझे कुछ इस तरह से लूट के चले गए,
मुस्कान तो छोड़ गए पर खुशियाँ ले गए||

Monday, November 21, 2011

बढती इंसानियत का हुआ असर, सांपों का घर अब नहीं रही ज़मीनें|
एहतियातन हमने कमीजों से अपनी, आज कटवा डाली हैं आस्तीनें||   

Friday, November 18, 2011

ठोकर खाई, लडखडाया और गिर गया, उठ के देखा तो हमकदम आगे बड़ गए|
यकीन नहीं होता साथ चलते कन्धों पे, अब दोस्त बनाने के पैमानें बदल गए||

Tuesday, November 15, 2011


Invasion, हमला,आक्रमण ,उन्नीसवी सदी में नाम थे जिनके|
"Bringing Democracy" इक्कीसवी सदी में नाम हुए उनके||

Thursday, November 10, 2011

toofan me bikharte chale gaye,
tanhai ki gehraiyo me utarte chale gaye,
zannat thi zindagi jinke sath...
ek-ek karke sab bichhadte chale gaye....
kya, kon, kese, kyon aur kab,
hazaro sawal zindagi puchhe tujhse,
har jawab banayega sawal khudse,
umar guzarega sari jawab dete dete,
apni mayyat pe bhi payega tu yehi sawal
kya, kon, kese, kyon aur kab???
ओ हरी, तेरी यह जगमाया मोहे भावे नहीं और,
छल कपट पाप प्रचंड मोहे इनसे बचा ले तू|
तो से ज्यादा मैं तो से, और का मांगू ओ मुरारी,
मोहे बना दे बंसुरिया और अधरों पे सजा ले तू||