ऐ मुकीम-ऐ-दिल तेरी उदासी की वजह क्या है,
अगर वजह हूँ मैं तो बता की मेरी सजा क्या है|
बेबस हूं मैं अभी मर्जी-ऐ-आसमानी के आगे,
वरना तेरे अश्कों के नमक में मुझे मजा क्या है|
जरा मेरा साथ तो दे ज़िन्दगी बहुत है बाकी,
वैसे इस पड़ाव के आगे सफ़र में बचा क्या है|
हालात काबू हो जायेंगे रफ़्तार-ऐ-वक़्त से,
थोड़े सब्र की गुजारिश है बता तेरी रजा क्या है|
साथ मेरे तो रहते हो पर साथ नहीं लगते हो,
मुस्कुराने के बाद दिल दुखाने की अदा क्या है।
haal me मर्जी-ऐ-आसमानी kabul he mujhko
ReplyDeleteashko ki nami me sukoin he mujhko
raftar-e-wakt me sabra he mujhko
tumhari guzarish me he raza mujhko
ऐ मुकीम-ऐ-दिल mann ke'aenne khas'me dekhle mujhko
he muskan tumhari sabse aziz mujhko..